Posts

Showing posts from June, 2022

मिस्र ने लिया भारतीय गेहूं, तुर्की के लिए जोरदार झटका

मिस्र ने 55,000 टन भारतीय गेहूं की पहली खेप को मंजूरी दे दी है. मिस्र के अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह पर पहली खेप पहुंचने के बाद गेहूं की जांच की गई और तय मानकों पर खरा उतरने के बाद हरी झंडी मिली. खबरों के मुताबिक मिस्र ने भारत द्वारा भेजे गए गेहूं की गुणवत्ता की सराहना की. पिछले कुछ दिनों से भारतीय गेहूं को लेकर काफी हंगामा मचा हुआ है. हाल ही में तुर्की ने भारतीय गेहूं की खेप को यह कहकर लौटा दिया था कि इसमें रूबेला वायरस पाया गया है. लेकिन भारत द्वारा भेजी गई गेहूं की पहली खेप को मिस्र ने स्वीकार कर लिया है. साथ ही गेहूं सभी तरह की जांच में सही पाया है. 'द हिंदू बिजनेस लाइन' ने एक निर्यातक के हवाले से लिखा कि गेहूं बेचने के लिए मिस्र सबसे कठिन बाजार है. साथ ही बड़ा बाजार भी है और जिस तरह से मिस्र ने भारतीय गेहूं की पहली खेप को स्वीकार किया है, ये तुर्की के लिए एक जोरदार झटका है, जिसने दो सप्ताह पहले ही भारतीय गेहूं की खेप को लौटा दिया था. निर्यातकों का मानना है कि मिस्र को गेहूं के एक्सपोर्ट से व्यापार के अवसर खुलेंगे.

रिहान ज़ैदी कोन है?

Image
रिहान ज़ैदी 

वसीयत क्यों है जरूरी

एक कानूनी दस्तावेज है जिसमें यह बताया जाता है कि अपना धन या अपनी संपत्ति मृत्यु के बाद किसे मिलेगी. यानी कि प्रॉपर्टी का उत्तराधिकारी या वारिस कौन होगा, वसीयत में इसकी जानकारी डिटेल में दी जाती है. अगर रुपये-पैसे की सेविंग करते हैं, अंत समय के लिए बचाते हैं तो वसीयत भी उतना ही जरूरी है. क्या पता बिना वसीयत के ही दुनिया छोड़नी पड़े. ऐसी स्थिति में उस सेविंग का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा. पूरा परिवार कमाई से वंचित रह जाएगा. यह सुनने में थोड़ा अटपटा लग सकता है क्योंकि वसीयत शब्द जुबान पर आते ही मृत्यु का खयाल आता है. लेकिन वसीयत सच्चाई है क्योंकि इसके बिना उत्तराधिकारी या वारिस को प्रॉपर्टी लेने में दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं. वसीयत कब होती है लागू twiter यहां जानना जरूरी है कि वसीयत तभी वैध होता है जब उसे लिखने वाला व्यक्ति इस दुनिया को छोड़ जाता है. वसीयत में लोग यह भी लिखते हैं कि उनकी दिली इच्छा क्या है और वे किस इच्छा की पूर्ति अपने वारिस या उत्तराधिकारी से कराना चाहते हैं. उदाहरण के लिए कई लोग चाहते हैं कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी प्रॉपर्टी का कुछ हिस्सा या पूरा हिस्सा दान-पुण्य के क...