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गाजियाबाद पत्रकार-पुलिस विवाद मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई जरूरी : रिहान ज़ैदी

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गाजियाबाद में पत्रकारों और पुलिस के बीच विवाद का मामला अब बड़ा आंदोलन बनता जा रहा है। पूरे प्रकरण की शुरुआत उस समय हुई जब पत्रकार सुमन मिश्रा के साथ कथित अभद्रता की घटना को लेकर शिकायत दर्ज कराने के लिए पत्रकार साथी सिद्धार्थ विहार स्थित जल निगम पुलिस चौकी पहुंचे। आरोप है कि चौकी प्रभारी के बुलावे पर पहुंचे पत्रकारों के सामने विपक्षी पक्ष के लोग भी मौजूद थे और बातचीत के दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही विपक्षी लोगों द्वारा गाली-गलौज और दबाव बनाया गया, लेकिन उन्हें रोकने के बजाय चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने ही पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया। आरोपों के अनुसार, ‘भारत का बदलता शासन’ समाचार पत्र के संपादक ललित चौधरी के साथ कथित रूप से धक्का-मुक्की की गई, उन्हें जबरन पुलिस वाहन में बैठाया गया और मारपीट की गई। यह भी आरोप लगाया गया कि सब-इंस्पेक्टर आयुष कुमार सहित कुछ पुलिसकर्मियों ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए पत्रकारों को धमकाया। घटना के बाद पत्रकार अपूर्वा चौधरी और अन्य साथी थाना विजयनगर पहुंचे, जहां उन्होंने थाना प्...

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल  गाजियाबाद। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर ‘सैल्यूट तिरंगा’ द्वारा आयोजित ‘अटल तिरंगा सम्मान–2025’ समारोह में गाजियाबाद की निर्भीक पत्रकार अपूर्वा चौधरी को सम्मानित किया जाएगा। यह भव्य आयोजन 26 दिसंबर 2025 को एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में प्रस्तावित है, जहां संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश झा के नेतृत्व में देशभर से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 30 विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मान प्रदान किया जाएगा। अपूर्वा चौधरी दैनिक समाचार पत्र ‘भारत का बदलता शासन’ की समाचार संपादक हैं और एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन की अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनकी पत्रकारिता केवल खबरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के उन वर्गों की आवाज़ बनने का प्रयास किया है, जिनकी पीड़ा और सवाल अक्सर हाशिये पर छूट जाते हैं। सत्ता, व्यवस्था और प्रशासन के बीच आम नागरिक के अधिकारों को सामने लाने में उनकी भूमिका को गाजियाबाद के पत्रकारिता जगत में विशेष सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है और निर...

काग़ज़ और सिक्कों पर छिपी बीमारियों का खतरा

काग़ज़ और सिक्कों पर छिपी बीमारियों का खतरा लेखक:  रिहान ज़ैदी, बढ़ापुर हम अक्सर नोट और सिक्कों को अपनी जेबों, बटुओं और हाथों से छूते रहते हैं। कभी दुकान पर लेन-देन में, कभी ऑटो या रिक्शे का किराया देने में और कभी बच्चों की टॉफी खरीदने में। लेकिन शायद ही हममें से कोई यह सोचता हो कि इन कागज़ी नोटों और धातु के सिक्कों पर कितनी बीमारियाँ पल रही होती हैं। विज्ञान की मानें तो नोट और सिक्के सबसे ज्यादा गंदे सामानों में गिने जाते हैं, क्योंकि ये हर हाथ से होकर गुजरते हैं। कोई व्यक्ति बीमार है, उसे जुकाम या खांसी है, उसने वही नोट छुआ और फिर वही नोट दर्जनों हाथों से होते हुए हमारे पास पहुँचा—इस पूरी प्रक्रिया में कितने ही वायरस और बैक्टीरिया हमारी हथेलियों तक आ जाते हैं। यही कारण है कि कागज़ और सिक्के इन्फेक्शन फैलाने के सबसे आसान जरियों में माने जाते हैं। दुनिया भर की शोधों में पाया गया है कि नोटों पर ई.कोलाई, स्टेफाइलोकोकस और साल्मोनेला जैसे खतरनाक जीवाणु मौजूद होते हैं, जो पेट और आंत की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। वहीं सिक्कों की धातु पर अक्सर फंगस और वायरस लंबे समय तक जीवित रहत...

तारीख बदली, चुनौतियां नहीं बदलीं: दिव्यांगों की जमीनी हकीकत

तारीख बदली, चुनौतियां नहीं बदलीं: दिव्यांगों की जमीनी हकीकत रिहान ज़ैदी लेख अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस हर साल 3 दिसंबर को आता है और गुजर भी जाता है, लेकिन उसके साथ जुड़े सवाल, वादे और हकीकतें तारीख बदलने से खत्म नहीं होतीं। दिवस के बाद भी जब समाज की सड़कें वही सीढ़ियां बनी रहती हैं, सरकारी दफ्तरों के दरवाजे वही संकरे रहते हैं और सोच वही पुरानी दया या उपेक्षा में अटकी रहती है, तब यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या हमने इस दिवस से सच में कुछ सीखा। दिव्यांगता शरीर की नहीं, व्यवस्था और नजरिए की असफलता बन जाती है, जब बराबरी का अधिकार कागजों में सिमट कर रह जाता है और जमीन पर संघर्ष ही दिव्यांग व्यक्ति की पहचान बन जाता है। दिव्यांग व्यक्ति की सबसे बड़ी लड़ाई उसकी अक्षमता से नहीं, बल्कि उस समाज से होती है जो उसे पहले कमजोर मान लेता है और बाद में अवसरों से दूर कर देता है। स्कूलों में समावेशी शिक्षा की बातें होती हैं, लेकिन रैम्प, संसाधन और प्रशिक्षित शिक्षक आज भी अपवाद बने हुए हैं। रोजगार में आरक्षण का प्रावधान है, पर नियुक्ति से पहले ही मानसिक दीवारें खड़ी कर दी जाती हैं। सार्वजनिक परिवहन, ...

📸 विश्व फोटोग्राफी दिवस: हर तस्वीर में एक कहानी , हर तस्वीर अपने आप में एक दुनिया बयां करती हैं

📸 विश्व फोटोग्राफी दिवस: हर तस्वीर में एक कहानी , हर तस्वीर अपने आप में एक दुनिया बयां करती है। 19 अगस्त, विश्व फोटोग्राफी दिवस, हमें यही याद दिलाता है कि फोटोग्राफी केवल कला नहीं, बल्कि भावनाओं, अनुभवों और यादों को सहेजने का तरीका है। हर क्लिक, हर फ्रेम, हर तस्वीर हमें उस पल की गहराई और कहानी के करीब ले जाती है। भारत जैसी विविधताओं से भरी दुनिया में फोटोग्राफी की अहमियत और भी बढ़ जाती है। चाहे ताजमहल की मूक भव्यता हो, राजस्थान के रेगिस्तान की सादगी, हिमालय की ऊँचाई या गांव की रोज़मर्रा की जिंदगी—फोटोग्राफी हर अनुभव को अमर बना देती है। खास बात यह है कि एक फोटोग्राफर केवल तस्वीर नहीं खींचता, बल्कि अपने दृष्टिकोण और संवेदनशीलता के साथ कहानी पेश करता है। जब कोई लेखक अपनी तस्वीर साझा करता है, तो वह केवल दृश्य नहीं दिखाता, बल्कि अपने अनुभव और सोच से पाठकों को जोड़ता है। यही फोटोग्राफी की असली ताकत है—जो हमें देखने, समझने और महसूस करने का मौका देती है। इस डिजिटल युग में तस्वीरें केवल यादें नहीं, बल्कि संदेश और जागरूकता फैलाने का भी जरिया बन गई हैं। आइए, इस विश्व फोटोग्राफी दिवस पर हम सभी अप...

पहाड़ों में हो रही लगातार बारिश ने पूरे जिले की स्थिति बिगाड़ दी है, यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है

बढ़ापुर। पहाड़ों में हो रही लगातार बारिश ने पूरे जिले की स्थिति बिगाड़ दी है, यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है। न अधिकारी अनजान हैं, न आम जनता। लेकिन बिजनौर के कस्बा बढ़ापुर के एक गांव छायली की स्थिति ऐसी है, जिसे सुनकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। यह वह जगह है जहां पानी केवल बरसात में नहीं बहता, बल्कि लोगों के जीवन, उम्मीदों और सपनों को भी बहा ले जाता है। बारिश का पानी जब छायली पहुंचता है तो केवल खेतों को डुबोता नहीं, बल्कि गांव की रोज़मर्रा की जिंदगी पर गहरा असर डालता है। बरसात थमती है, लेकिन लोगों का संघर्ष लगातार जारी रहता है। यहां पानी केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही प्रशासनिक चुनौतियों का भी परिचायक है। साल 2023 में इस गांव के छात्र नदी पार न कर पाने की मजबूरी में नदी किनारे ही तिरंगा लहराकर आज़ादी का जश्न मनाए थे। जश्न तो हुआ, लेकिन वह खुशी फिर कभी वापस नहीं आई। 2025 में भी हालात यथावत हैं। 15 अगस्त को फिर से बच्चे पानी में झंडा लहराने को मजबूर हैं। साल बीतते जा रहे हैं, मगर ग्रामीणों की आवाज़ें आज भी इस पानी को पार कर के किसी के कान तक नहीं पहुंच पा रही हैं। गां...

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस तथा विज्ञान व कला प्रदर्शनी

सेंट मेरीज स्कूल नगीना में स्वतंत्रता दिवस तथा विज्ञान व कला प्रदर्शनी का आयोजन बहुत ही धूमधामसे किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि फादर थॉमस अपांचरा तथा विशिष्ट अतिथि फादर जार्ज तथा मैडम क्रस्टमारिया रहीं। सर्वप्रथम ध्वजारोहण किया गया जिसमें फादर थॉमस अपांचरा ने ध्वजारोहण किया तथा अन्य अतिथि फादर जार्ज, मैडम क्रिस्टे भारियां, विद्‌यालय फादर अनूप प्रधानाचार्य फादर शायपू तथा सभी सिस्टर्स उपस्थित रहे। प्रधानाचार्य फादर शायजू ने स्वागत भाषण देकर सभी अतिथिगण तथा अविभावक गण का स्वागत किया तथा मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि को स्मृति चिह्न चिह देकर सम्मानित किया । तत्पश्चात वि‌द्यालय में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए जिसमें ऑपरेशन सिंदूर, समूहगान तथा एरोबिका डांस है प्रमुख थे। वि‌द्यालय देशभक्ति के नारों से उठा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के व अभिभावक गण पश्चात सभी विज्ञान व व कला प्रदर्शनी की ओर अग्रसर हुए जिसका उद्‌‌घाटन जर्मनी से ज्याई विशिष्ट अतिथि मैडम किस्टेमारिया ने फीता काटकर किया। वि‌द्यालय में ययोजित विमान तथा कला प्रर्दशनी में सभी विषयों से सम्बंधित मॉडल्स बंद विद्‌यार्थियों के...